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Monday, 6 August 2018

Secret of Success – सफ़लता का रहस्य


एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा कि सफलता का रहस्य क्या है?
सुकरात ने उस लड़के से कहा कि तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो. वो मिले. फिर सुकरात ने नौजवान से उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा.और जब आगे बढ़ते-बढ़ते पानी गले तक पहुँच गया, तभी अचानक सुकरात ने उस लड़के का सर पकड़ के पानी में डुबो दिया.

लड़का बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगा , लेकिन सुकरात ताकतवर थे और उसे तब तक डुबोये रखे जब तक की वो नीला नहीं पड़ने लगा. फिर सुकरात ने उसका सर पानी से बाहर निकाल दिया और बाहर निकलते ही जो चीज उस लड़के ने सबसे पहले की वो थी हाँफते-हाँफते तेजी से सांस लेना.

सुकरात ने पूछा ,” जब तुम वहाँ थे तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे?”

लड़के ने उत्तर दिया,”सांस लेना”
सुकरात ने कहा,” यही सफलता का रहस्य है. जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोगे जितना की तुम सांस लेना चाहते थे तो वो तुम्हे मिल जाएगी” इसके आलावा और कोई रहस्य नहीं है.

दोस्तो जब हम अपनी जिंदगी में किसी एक चीज को पूरी शिद्दत से चाहते हैं तो हमारे दिमाग में हमारी यह शिद्दत इतनी intensity पैदा कर देती है की हमारा हर काम उसी एक चीज को पाने के मकसद से होने लगता है |

इसलिए अगर जीवन में सफ़ल होना चाहते हो तो सफ़लता तो अपना एक मात्र मकसद बना लो, हर समय दिमाग में सफ़लता के ही विचार आने चाहिए फिर वो दिन दूर नहीं जब आपको ये सफ़लता मिलेगी ही मिलेगी |



What is the greatest strength -Motivational Story in Hindi

जापान के एक छोटे से कसबे में रहने वाले दस वर्षीय ओकायो को जूडो सीखने का बहुत शौक था . पर बचपन में हुई एक दुर्घटना में बायाँ हाथ कट जाने के कारण उसके माता -पिता उसे जूडो सीखने की आज्ञा नहीं देते थे . पर अब वो बड़ा हो रहा था और उसकी जिद्द भी बढती जा रही थी .
अंततः माता -पिता को झुकना ही पड़ा और वो ओकायो को नजदीकी शहर के एक मशहूर मार्शल आर्ट्स गुरु के यहाँ दाखिला दिलाने ले गए .
गुरु ने जब ओकायो को देखा तो उन्हें अचरज हुआ कि , बिना बाएँ हाथ का यह लड़का भला जूडो क्यों सीखना चाहता है ?
उन्होंने पूछा , “ तुम्हारा तो बायाँ हाथ ही नहीं है तो भला तुम और लड़कों का मुकाबला कैसे करोगे .”

“ ये बताना तो आपका काम है” ,ओकायो ने कहा . मैं तो बस इतना जानता हूँ कि मुझे सभी को हराना है और एक दिन खुद “सेंसेई” (मास्टर) बनना है ”

गुरु उसकी सीखने की दृढ इच्छा शक्ति से काफी प्रभावित हुए और बोले , “ ठीक है मैं तुम्हे सीखाऊंगा लेकिन एक शर्त है , तुम मेरे हर एक निर्देश का पालन करोगे और उसमे दृढ विश्वास रखोगे .”

ओकायो ने सहमती में गुरु के समक्ष अपना सर झुका दिया .
गुरु ने एक साथ लगभग पचास छात्रों को जूडो सीखना शुरू किया . ओकायो भी अन्य लड़कों की तरह सीख रहा था . पर कुछ दिनों बाद उसने ध्यान दिया कि गुरु जी अन्य लड़कों को अलग -अलग दांव -पेंच सीखा रहे हैं लेकिन वह अभी भी उसी एक किक का अभ्यास कर रहा है जो उसने शुरू में सीखी थी . उससे रहा नहीं गया और उसने गुरु से पूछा , “ गुरु जी आप अन्य लड़कों को नयी -नयी चीजें सीखा रहे हैं , पर मैं अभी भी बस वही एक किक मारने का अभ्यास कर रहा हूँ . क्या मुझे और चीजें नहीं सीखनी चाहियें ?”

गुरु जी बोले , “ तुम्हे बस इसी एक किक पर महारथ हांसिल करने की आवश्यकता है ” और वो आगे बढ़ गए.

ओकायो को विस्मय हुआ पर उसे अपने गुरु में पूर्ण विश्वास था और वह फिर अभ्यास में जुट गया .

समय बीतता गया और देखते -देखते दो साल गुजर गए , पर ओकायो उसी एक किक का अभ्यास कर रहा था . एक बार फिर ओकायो को चिंता होने लगी और उसने गुरु से कहा , “ क्या अभी भी मैं बस यही करता रहूँगा और बाकी सभी नयी तकनीकों में पारंगत होते रहेंगे ”

गुरु जी बोले , “ तुम्हे मुझमे यकीन है तो अभ्यास जारी रखो ”

ओकायो ने गुरु कि आज्ञा का पालन करते हुए बिना कोई प्रश्न पूछे अगले 6 साल तक उसी एक किक का अभ्यास जारी रखा .
सभी को जूडो सीखते आठ साल हो चुके थे कि तभी एक दिन गुरु जी ने सभी शिष्यों को बुलाया और बोले ” मुझे आपको जो ज्ञान देना था वो मैं दे चुका हूँ और अब गुरुकुल की परंपरा के अनुसार सबसे अच्छे शिष्य का चुनाव एक प्रतिस्पर्धा के माध्यम से किया जायेगा और जो इसमें विजयी होने वाले शिष्य को “सेंसेई” की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा.”
गुरु जी ओकायो को उसके पहले मैच में हिस्सा लेने के लिए आवाज़ दी .

ओकायो ने लड़ना शुर किया और खुद को आश्चर्यचकित करते हुए उसने अपने पहले दो मैच बड़ी आसानी से जीत लिए . तीसरा मैच थोडा कठिन था , लेकिन कुछ संघर्ष के बाद विरोधी ने कुछ क्षणों के लिए अपना ध्यान उस पर से हटा दिया , ओकायो को तो मानो इसी मौके का इंतज़ार था , उसने अपनी अचूक किक विरोधी के ऊपर जमा दी और मैच अपने नाम कर लिया . अभी भी अपनी सफलता से आश्चर्य में पड़े ओकयो ने फाइनल में अपनी जगह बना ली .

इस बार विरोधी कहीं अधिक ताकतवर, अनुभवी और विशाल था . देखकर ऐसा लगता था कि ओकायो उसके सामने एक मिनट भी टिक नहीं पायेगा .

सबसे बड़ी ताकत

मैच शुरू हुआ , विरोधी ओकायो पर भारी पड़ रहा था , रेफरी ने मैच रोक कर विरोधी को विजेता घोषित करने का प्रस्ताव रखा , लेकिन तभी गुरु जी ने उसे रोकते हुए कहा , “ नहीं , मैच पूरा चलेगा ”

मैच फिर से शुरू हुआ .
विरोधी अतिआत्मविश्वास से भरा हुआ था और अब ओकायो को कम आंक रहा था . और इसी दंभ में उसने एक भारी गलती कर दी , उसने अपना गार्ड छोड़ दिया !! ओकयो ने इसका फायदा उठाते हुए आठ साल तक जिस किक की प्रैक्टिस की थी उसे पूरी ताकत और सटीकता के साथ विरोधी के ऊपर जड़ दी और उसे ज़मीन पर धराशाई कर दिया . उस किक में इतनी शक्ति थी की विरोधी वहीँ मुर्छित हो गया और ओकायो को विजेता घोषित कर दिया गया .

मैच जीतने के बाद ओकायो ने गुरु से पूछा ,” सेंसेई , भला मैंने यह प्रतियोगिता सिर्फ एक मूव सीख कर कैसे जीत ली ?”
“ तुम दो वजहों से जीते ,” गुरु जी ने उत्तर दिया . “ पहला , तुम ने जूडो की एक सबसे कठिन किक पर अपनी इतनी मास्टरी कर ली कि शायद ही इस दुनिया में कोई और यह किक इतनी दक्षता से मार पाए , और दूसरा कि इस किक से बचने का एक ही उपाय है , और वह है वोरोधी के बाएँ हाथ को पकड़कर उसे ज़मीन पर गिराना .”
ओकायो समझ चुका था कि आज उसकी सबसे बड़ी कमजोरी ही उसकी “सबसे बड़ी ताकत” बन चुकी थी .

मित्रों human being होने का मतलब ही है imperfect होना. Imperfection अपने आप में बुरी नहीं होती, बुरा होता है हमारा उससे deal करने का तरीका. अगर ओकायो चाहता तो अपने बाएँ हाथ के ना होने का रोना रोकर एक अपाहिज की तरह जीवन बिता सकता था, लेकिन उसने इस वजह से कभी खुद को हीन नहीं महसूस होने दिया. उसमे अपने सपने को साकार करने की दृढ इच्छा थी और यकीन जानिये जिसके अन्दर यह इच्छा होती है भगवान उसकी मदद के लिए कोई ना कोई गुरु भेज देता है, ऐसा गुरु जो उसकी सबसे बड़ी कमजोरी को ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बना उसके सपने साकार कर सकता है.

Friday, 3 August 2018

Why Youngsters Fail in Life – Motivational story in Hindi


हम अपनी जिंदगी कई टारगेट फिक्स करते पर वास्तव में होता क्या है की जहा हमे उन टारगेट की और बढ़ना होता है और हम उनसे उतना ही दूर चलते जाते है जिससे होता ये है की हमारे पास पछतावे के सिवा  और कोई रास्ता नहीं होता है जिसका सबसे बड़ा कारण है लाइफ की कुछ गलतिया जो शायद हमे उस समय हमारा सही फैसला लगता है पर जब हम आगे निकल जाते है तब हमे उन गलतियों का अहसास होता है। सक्सेस और फैलियर में ज्यादा फर्क नहीं है बस कुछ चीज़े होती है जो आपको दोनो में फर्क बताती है।  
इस बात को आप इस कहानी से और अच्छे से समझ पायेंगे।


– हम लोग सपने देखते हैं.


– टारगेट सेट करते हैं.


– पैसा और टाइम इन्वेस्ट करते हैं.


– हमारे इरादे भी मजबूत होते हैं.


और उसे पाने के लिए बहुत मेहनत भी करते हैं. लेकिन फिर भी सक्सेसफुल नहीं हो पाते.

आप समझ जायेंगे की आपके साथ ऐसा क्यूँ होता है.

एक 20-22 साल का लड़का सामान लेकर किसी स्टेशनपर उतरा।

उसनेँ एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे साईँ बाबा के मंदिर जाना है।

टैक्सी वाले नेँ कहा- 100 रुपये लगेँगे।

लड़के ने किसी से सुन रखा था की साईं मंदिर स्टेशन से 4-5 km ही दूर है

सो अपना सामान पीठ पर लाद कर वो जोश जोश में चल पड़ा

काफी दूर आने के बाद उसे फिर वहीँ टेक्सी वाला दिखाई दिया और उसने पूछा

भैया अब तो मैं बहुत दूर आ गया हूँ अब कितने रूपए लोगे

टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- 200 रुपये।

लड़के ने गुस्से में कहा- पहले 100 रुपये, अब 200 रुपये, ऐसा क्योँ।

टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- महोदय, इतनी देर से आप साईँ मंदिर की विपरीत दिशा मेँ दौड़ लगा रहे हैँ जबकि साईँ मँदिर तो दुसरी तरफ है।

अब बेचारे लड़के ने कुछ भी नहीँ कहा और चुपचाप टैक्सी मेँ बैठ गया।

यहीं होता है हमारे साथ जिंदगी में

हम लोग टारगेट सेट कर लेते हैं और उसे पाने के लिए बिना सही प्लान बनाये या बिना किसी की सलाह लिए चलना शुरू कर देते हैं

और जब तक हमें ये अहसास होता है की हम गलत ट्रैकपर हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है

हमेशा एक बात याद रखेँ कि दिशा सही होनेँ पर ही मेहनत पूरा रंग लाती हैऔर यदि दिशा ही गलत हो तो आप कितनी भी मेहनत का कोई लाभ नहीं मिल पायेगा।

जिस फील्ड में आप जाना चाहते हैं उस फील्ड के सक्सेसफुल लोगों से मिलिए, उनके बारे में पढ़िए

पूरी रिसर्च कीजिये और फिर अपने कदम आगे बढ़ायो

एक बार सही दिशा मिल गयी तो आपको सक्सेसफुल होने से कोई नहीं रोक सकता.


Hobbies और अपने Passion के बीच का फर्क समझे


Amazon के फाउंडर और दुनिया के सबसे अमीर इंसान जेफ़ बेजोइस ने एक बार कॉलेज स्टूडेंट्स को लेक्चर देते हुए कहा था की – अक्सर लोग इसलिए असफ़ल हो जाते है क्यूं कि लोग अपनी Hobbies और अपने Passion के बीच में फर्क नहीं कर पाते, लोगों को लगता है की जो काम करना उन्हें अच्छा लगता है वहीँ उनका पैशन बन सकता है, जबकि सच ये हैं की हम अपने पैशन को नहीं चुनते हमारा पैशन हमें चुनता है. Hobbies हमेशा बदलती रहती हैं इसलिए लोग जब अपनी Hobbies के according काम करते हैं तो कुछ टाइम बाद वो अपने काम से बोर होने लगते हैं, इसी वजह से आज हम लोगों को यहाँ से वहां भागते हुए देखते हैं.

Hobbies और अपने Passion के बीच का फर्क समझे   असल में आज के इस दौर में लोगों को जो भी काम आसान लगता है और जिसमे उन्हें लगता है की जल्दी पैसा आ सकता है – उसे लोग अपना पैशन बनाने की कोशिश करने लगते हैं जबकि Passion वो चीज है जिसका कनेक्शन सीधे आपके दिल से जुड़ा होता है, अगर आप किसी काम को लेकर बिलकुल पैशनेट हैं तो फिर इस बात से आपको बिलकुल भी फर्क नहीं पड़ेगा की आप उस काम में कितना वक्त दें रहे हैं, जितना आप उसे करते जायेंगे उतना ही आपको उसमे मजा आता जायेगा, जैसे जैसे उसमे मुश्किलें बढ़ेंगी आपकी उसे पूरा करना का जूनून भी बढ़ता जायेगा


जबकि Hobbies को करते वक्त जैसे जैसे मुश्किलें बढती हैं और टाइम बीतता है हमारा जूनून कम होता जाता है .
इसके आगे जेफ़ बेजोइस कहते हैं की अगर आप इनोवेटिव होना चाहते हैं तो फ़ैल होने के लिए तयार रहिये, क्यूंकि कोई भी इनोवेशन तभी हो सकती है जब उसमे आप बार बार फ़ैल फ़ैल होते हैं. ये फेलियर आपको हर बार एक नया रास्ता एक नया तरीका खोजने पर मजबूर करते हैं और यहीं वो एक मात्र तरीका है जो आपको आपके Passion से रूबरू करवाता है. इसलिए हमेशा कुछ इनोवेटिव प्रयास करते रहिये और ये आपको एक दिन आपके पैशन से रूबरू करवा देंगे.

और ऐसा करते करते अंत में जब आप कामयाब होते हैं तो एक बिलकुल नया इनोवेशन दुनिया के सामने आता है , जिसे लोग हाथों हाथ स्वीकार करते हैं, और आपका भाग्य बदल जाता है.

Saturday, 28 July 2018

रेस में जितने वाले घोड़े को तो पता भी नहीं होता की जित वास्तव में क्या है................





रेस में जितने वाले घोड़े को तो पता भी नहीं होता की जित वास्तव में क्या है, वो तो अपने मालिक द्वारा दी गई तकलीफ की वजह से ही दौड़ता है, इसलिए यदि आपकी जीवन में कभी कोई तकलीफ आए तो समझ लेना कि आपका मालिक आपको जितना चाहता है. क्युकी जो व्यक्ति शक्ति नहीं होते हुए भी मन से हार नहीं मानता, उसको दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती.

मुश्किल वक्त दुनिया का सबसे बड़ा जादूगर है!
जो एक पल में आपके चाहने वालों के चेहरे से
नकाब हटा देता है! इसलिए वोही वक़्त मै पता चलता है की कौन आप के चाहने वाले है सबसे जयदा।

ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है इसे आप कुछ दो पल की खुशी के लिए मत ख़राब करो क्योकि एक सैकंड में...............

ज़िंदगी बहुत खूबसूरत है इसे आप कुछ दो पल की खुशी के  लिए मत ख़राब करो क्योकि एक सैकंड में लिया हुआ फैसला वाकई में आपकी जिंदगी बदल सकता है और  वो आपके हाथ मे है की  आप कैसा फैसला लेते है। 




जब पांच सेकंड की मुस्कान से फोटो अच्छी आ सकती है तो
हमेशा मुस्कुराने से जिन्दगी अच्छी क्यों नही हो सकती है?

👭 ज़िंदगी 😌 चाहे एक_दिन ☝ की हो या चाहे चार_दिन ☺ की,
उसे ऐसे_जियो 😉 जैसे कि ज़िंदगी_तुम्हें 👩 नहीं मिली, 😒 ज़िंदगी 😌 को तुम_मिले 👩 हो ।। 😘👩

खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले😎
👀👀👀👀👀👀👀

खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है❤️

Friday, 27 July 2018

Success Definition in our Life Stage

Success is the Seven Character Word but there Mean is Different in our life Stage.



What is Success?..
  •  At the age of 1 years - Success is that you can walk without support
  •  At the age of 4 years  -   Success is that you do not urinate in your pants,
  •  At the age of 8 years  -   Success is to know the way back home.
  •  At the age of 12 years  - success is to have friends.
  •  At the age of 18 years - success is to get a driver's license.
  •  At the age of 23 years - success is to graduate from a university.
  •  At the age of 25 years - success is to get an earning.
  •  At the age of 30 years - success is to be a family Man.
  •  At the age of 35 years - success is to make money.
  •  At the age of 45 years - success is to maintain the appearance of a young man.
  •  At the age of 50 years - success is to provide good education for your children.
  •  At the age of 55 years - success is to still be able to perform your duties well.
  •  At the age of 60 years – success to still be able to keep driving license.
  • At the age of 65 years - success is to live without disease.
  • At the age of 70 years - success is to not be a burden on any one.
  • At the age of 75 years - success is to have old friends.
  • At the age of 81 years - success is to know the way back home.
  • At the age of 86 years - success is that not to urinate in your pants again.
  • At the age of 90 years - Success is that you can walk without support again
Life is a cycle.!