हम अपनी जिंदगी कई टारगेट फिक्स करते पर वास्तव में होता क्या है की जहा हमे उन टारगेट की और बढ़ना होता है और हम उनसे उतना ही दूर चलते जाते है जिससे होता ये है की हमारे पास पछतावे के सिवा और कोई रास्ता नहीं होता है जिसका सबसे बड़ा कारण है लाइफ की कुछ गलतिया जो शायद हमे उस समय हमारा सही फैसला लगता है पर जब हम आगे निकल जाते है तब हमे उन गलतियों का अहसास होता है। सक्सेस और फैलियर में ज्यादा फर्क नहीं है बस कुछ चीज़े होती है जो आपको दोनो में फर्क बताती है।
इस बात को आप इस कहानी से और अच्छे से समझ पायेंगे।

– हम लोग सपने देखते हैं.
– टारगेट सेट करते हैं.
– पैसा और टाइम इन्वेस्ट करते हैं.
– हमारे इरादे भी मजबूत होते हैं.
और उसे पाने के लिए बहुत मेहनत भी करते हैं. लेकिन फिर भी सक्सेसफुल नहीं हो पाते.
आप समझ जायेंगे की आपके साथ ऐसा क्यूँ होता है.
एक 20-22 साल का लड़का सामान लेकर किसी स्टेशनपर उतरा।
उसनेँ एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे साईँ बाबा के मंदिर जाना है।
टैक्सी वाले नेँ कहा- 100 रुपये लगेँगे।
लड़के ने किसी से सुन रखा था की साईं मंदिर स्टेशन से 4-5 km ही दूर है
सो अपना सामान पीठ पर लाद कर वो जोश जोश में चल पड़ा
काफी दूर आने के बाद उसे फिर वहीँ टेक्सी वाला दिखाई दिया और उसने पूछा
भैया अब तो मैं बहुत दूर आ गया हूँ अब कितने रूपए लोगे
टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- 200 रुपये।
लड़के ने गुस्से में कहा- पहले 100 रुपये, अब 200 रुपये, ऐसा क्योँ।
टैक्सी वाले नेँ जवाब दिया- महोदय, इतनी देर से आप साईँ मंदिर की विपरीत दिशा मेँ दौड़ लगा रहे हैँ जबकि साईँ मँदिर तो दुसरी तरफ है।
अब बेचारे लड़के ने कुछ भी नहीँ कहा और चुपचाप टैक्सी मेँ बैठ गया।
यहीं होता है हमारे साथ जिंदगी में
हम लोग टारगेट सेट कर लेते हैं और उसे पाने के लिए बिना सही प्लान बनाये या बिना किसी की सलाह लिए चलना शुरू कर देते हैं
और जब तक हमें ये अहसास होता है की हम गलत ट्रैकपर हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है
हमेशा एक बात याद रखेँ कि दिशा सही होनेँ पर ही मेहनत पूरा रंग लाती हैऔर यदि दिशा ही गलत हो तो आप कितनी भी मेहनत का कोई लाभ नहीं मिल पायेगा।
जिस फील्ड में आप जाना चाहते हैं उस फील्ड के सक्सेसफुल लोगों से मिलिए, उनके बारे में पढ़िए
पूरी रिसर्च कीजिये और फिर अपने कदम आगे बढ़ायो
एक बार सही दिशा मिल गयी तो आपको सक्सेसफुल होने से कोई नहीं रोक सकता.
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