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Wednesday, 15 August 2018

Angry Birds Success Story | Rovio startup story Hindi


Rovio Startup Success Story

2009 में रोविओ एंटरटेनमेंट बंद होने की कगार पर आ गई थी। कंपनी ने स्टाफ 50 से घटाकर 12 कर दिया था। कंपनी के बनाए कई गेमिंग एप फ्लॉप हो चुके थे। फिर एक आखिरी प्रयास ने कंपनी को रातो–रात प्रसिद्ध बना दिया। यह था एंग्री बडर्स। सिर्फ तीन दिन में ही गेम इतना ज्यादा डाउनलोड किया गया कि यह नंबर वन डाउनलोडेड गेम बन गया। इसके पहले मोस्टडाउनलोडेड की लिस्ट में 600वें नंबर था।  

    2003 में निकोलस हेड ने अपने दोस्तों के साथ हेलसिंकी         विश्वविद्यालय की मल्टीप्ल्येयर मोबाइल गेम बनाने      की   एक प्रतियोगिता जीती थी। तब वे 29 साल के थे। इसके   बाद से ही वे एक गेमिंग कंपनी स्थापित करने की योजना    बना रहे थे। यह विचार अपने चचेरे भाई माइकल हेड के साथ    साझा किया। निकोलस ने ज्यादा इंतजार न करते हुए 2004    में रिल्यूड कंपनी बनाई। यही कंपनी 2005 में रोविओ बनी और उनके भाई माइकल कंपनी में चीफ एग्जीक्यूटिव के रूप में शामिल हुए। काम शुरू हुआ, लेकिन फंड की बहुत कमी थी। फिर माइकल के पिता से मदद मिली। वे सफल आंत्रप्रेन्योर थे। निकलस और माइकल ने उन्हें अपने स्टार्टअप में एक मिलियन यूरो निवेश करने के लिए राजी कर लिया था। 
काम शुरू तो हुआ, लेकिन माइकल और उनके पिता कंपनी की दिशा से सहमत नहीं थे। माइकल के निजी जीवन में कुछ उथल–पुथल मची हुई थी। इसलिए एक साल बाद माइकल ने कंपनी छोड़ दी। इसके बाद कंपनी लगातार कमजोर पड़ती जा रही थी, लेकिन निकोलस लगे रहे। कंपनी ईए, नामको और रियल नेटवर्क्स जैसी कंपनियों के लिए गेम्स डेवलप कर रही थी। कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लग रही थी । 

निकोलस के पास अपने प्रोडक्टस के लिए कोई मार्केटिंग पॉलिसी नहीं थी। डिस्ट्रीब्यूशन कमजोर था। 2006 में कंपनी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई थी। खर्च कम करने के लिए निकोलस स्टाफ की संख्या घटाकर 12 पर ला चुके थे। फिनलैंड में तब फिजिकल गेमिंग का दौर चल रहा था, जिसमें असली दुनिया की ताकत होती थी। कार्टून जैसे धमाके और गति पसंद नहीं किए जाते थे। ऑनलाइन गेम पॉपुलर थे, लेकिन कोई भी सरल और मोबाइल फोन में चलने वाले गेम नहीं बना रहा था। इसी दौरान स्टीव जॉब्स ने आईफोन लॉन्च किया था। इधर निकोलस माइकल को फिर से कंपनी में ले आए थे। दोनों ने मिलकर कंपनी को बचाने के लिए प्लान बनाया। वे लगातार बड़े डेवलपर्स पर नजर रख रहे थे। सारा काम छोड़कर बड़ा जोखिम लेने की स्थिति नहीं थी। इसलिए कंपनी अपना नियमित काम करती रही। दोनों बचा हुआ पूरा समय आईफोन के लिए मोबाइल गेम डेवलप करने पर दे रहे थे। माइकल ने इस प्रोजेक्ट के लिए 25 हजार यूरो का बजट रखा था। और आखिर में जब प्रोजेक्ट पूरा हुआ तो एंग्री बर्ड की लागत इससे चार गुना ज्यादा रही थी। 

रोविओ की चीफ डिजाइनर जैको लिसालो नए प्रोजेक्ट के लिए सैकड़ों कैरेक्टर्स के स्केच बना चुके थे। आखिर मार्च 2009 में उन्होंने एक बर्ड बनाया, जिसकी नाक पर गुस्सा सवार था। इस पक्षी में कुछ खास था जो सभी को चौंका रहा था। निकलस ने पहली बार जब एंग्री बडर्स देखा तो उनकी इच्छा हुई मुझे यह गेम खेलना है। दिसंबर 2009 की छुट्टियों में यह गेम जारी हुआ। पहले तीन महीनों में कुछ होता नजर नहीं आ रहा था। लग रहा था कि यह कंपनी को एक और फ्लॉप प्रोडक्ट है। फिर फरवरी 2010 में एपल इस गेम को अपने एप स्टोर के फ्रंट पेज पर लाने के लिए राजी हो गया और देखते ही देखते एंग्री बडर्स दुनियाभर में छा गया। इतना कि इसे कार्टुन कैरेक्टर मिकी माउस के समान पॉपुलर कहा जाने लगा। इसके बाद राविओ को 42 बिलियन डॉलर की फंडिंग मिल गई। माइकल और निकोलस ने इसका इस्तेमाल नए मार्केट की तलाश और एंग्री बडर्स को एक ब्रैंड की तरह स्थापित करने में किया।

आज एंग्री बडर्स बहु आयामी इंटरटेनमेंट हाउस बन चुका है। कंपनी एंग्री बडर्स नाम से कई उत्पाद भी बेचती है। कंपनी स्टोरी, कॉमिक, एक्टिविटी और लर्निंग बुक्स भी प्रकाशित करती है। इसके फ़िनलैंड के अलावा चीन, स्वीडन, अमेरिका यूके और जापान में ऑफिस है

Ashish Hemrajani BookmyShow Success Story in hindi


Inspirational real life stories for businessman

Ashish Hemrajani
मूवी टिकट की बिक्री में करोड़ों का बिजनेस
कंपनी : बिग ट्री एंटरटेनमेंट
क्या खास : ऑनलाइन एंटरस्टेनमेंट टिकटिंग की शुरुआत
मुंबई यूनिवर्सिटी से एमबीए के बाद आशीष का अगला पड़ाव था नौकरी। 1997 में एडवरटाइजिंग कंपनी हिंदुस्तान थॉमसन एसोसिएट के साथ उन्होंने अपने कॅरिअर की शुरुआत की। इसी दौरान आशीष का दक्षिण अफ्रीका जाना हुआ। यहां इंटरनेट के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं से प्रभावित होकर 24 साल के आशीष के मन में नए – नए आइडिया आने लगे। जिनके चलते उन्होंने यहां फ़ैनडैंगो और टिकटमास्टर जैसी इंटरनेशनल टिकटिंग कंपनियों की वेबसाइट खंगाली। अफ्रीका से लौटते हुए पूरे सफर के दौरान आशीष इन्हीं आइडियाज के बारे में सोचते रहे।
मुश्किल चुनौती, मजबूत इरादे- 
आशीष ने अपने देश में टेलीफोन और इंटरनेट के जरिए मूवी के टिकट बेचने का फैसला लिया और इसके लिए नौकरी छोड़ दी। यह वह दौर था जब सिनेमा के टिकट बेचना अच्छा नहीं समझा जाता था। ऐसे में यह फैसला लेना काफी मुश्किल था, चुनौतियों के बावजूद उन्होने 1999 में बिग ट्री एंटरटेनमेंट की स्थापना की। इस दिशा में पहला कदम उठाते हुए आशीष ने अपने बिजनेस प्लान के बारे में बताते हुए चेज़ कैपिटल को एक ईमेल भेजा, करीब सात दिन बाद वहां से जवाब आया और आधा मिलियन डॉलर की फंडिंग के निवेश के साथ उन्होनें कारोबार की शुरुआत की। इस दौरान देश कम्प्यूटर से परिचय ही कर रहा था, कम लोगों के पास क्रेडिट कार्ड हुआ करते थे और नेट बैंकिंग से तो कोई भी वाकिफ नहीं था। दूसरी परेशानी यह थी कि यहां थिएटरों और सिंगल स्क्रीन्स में ई-टिकटिंग सॉफ्टवेयर का अभाव था, ऐसे में आशीष पहले थिएटरों से बड़ी मात्रा में टिकट खरीदते और फिर कस्टमर्स को उपलब्ध करवाते थे।
बिग ट्री से बुक माय शो- 
तमाम चुनौतियों के बीच आशीष ने हिम्मत नहीं हारी। 2001 में बिग ट्री के पास 160 कर्मचारियों की टीम तैयार हो चुकी थी कि तभी डॉट कॉम ठप्प पड़ गया। इससे उबरने के लिए आशीष को सख्त कदम भी उठाने पड़े। लगातार कोशिशों के बल पर उन्होने कंपनी को संकट के दौर से निकाला और 2002-04 में कंपनी को सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन प्रोवाइडर का दर्जा दिलाया, जो थिएटरों को ऑटोमेटेड टिकटिंग सॉफ्टवेयर प्रदान करती है। 2007 में आशीष ने बिग ट्री को बुक माय शो के नाम से रीलॉन्च किया। आज बुक माय शो 1000 करोड़ के वैल्यूएशन क्लब में शामिल हो गया है और कंपनी ने ऑनलाइन एंटरटेनमेंट टिकटिंग का 90 फीसदी से ज्यादा बिजनेस अपने नाम कर लिया है।

Thursday, 2 August 2018

Rahul Sharma Success Story Co-Founder of Micromax In Hindi


Rahul Sharma Success Story : आज हम आपके सामने ला  रहे है Micromax CO-Founder Rahul Sharma inspirational success story – आज राहुल शर्मा एक बड़ा नाम है लेकिन हमेशा से ऐसे नहीं था | आज राहुल शर्मा एक Luxurious लाइफ जीते है Rolls-Royce के शौकीन है लकिन शुरुवात मे वो एक साधारण से परिवार के लड़के थे | राहुल एक school teacher के बेटे है और अपने शुरू के दिनों मे local transport use करने वाले रहे है | 
Rahul Sharma Success Story एक School Teacher के बेटे Rahul Sharma ने engineering एवं B.Com करने के बाद एक  Manufacturing company में नौकरी शुरू की। कुछ टाइम काम करने के बाद कंपनी छोड़ दी | Rahul Sharma को टेक्नोलॉजी मे जुड़ाव तब शुरू हुआ जब उनके father ने उनकों computer गिफ्ट किया | PC use करने के बाद उनका Technology से इतना जुड़ाव हुआ की वो एक नयी कंपनी तक जा पंहुचा | उन्होंने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर year 2000 मे Micromax software launch की | Starting मे यह एक software company थी फिर बाद मे embedded प्लेटफॉर्म्स पर enterprise-resource ट्रेनिंग शुरू की जिसने कम्प्यूटर्स, सॉफ्टवेयर और बाद मे फिक्स्ड वायरलेस पीसीओ बेचे। संयोग से machine to machine बिजनेस में Nokia Micromax का partner बन गया।Micromax ने पहले Nokia के लिए एवं फिर Airtel के लिए Public phones (PCO’s) sell किये | 
Rahul Sharma Success Story

राहुल शर्मा जब PCO का business देख रहे थे तब उन्होंने कुछ ऐसा नोटिस किया जिसके बाद उनकी लाइफ बिलकुल चेंज हो गयी | सन 2007 मे उनका West Bengal के Behrampur village मे जाना हुआ तो उन्होंने देखा लोगो को ज्यादा समय power नहीं आने की वजह से truck की battery से PCOs को चलना पड़ रहा था | हर रात को PCO owner को 12 Kmदूर तक Battery को ले जाना पड़ता और फिर रात भर battery को charge करके वापस अपने village Behrampur आ कर PCO चलता | इसके साथ साथ उनका Interest और बड़ गया जब उन्होंने देखा की पुरे दिन भर PCO वाले के पास Phone करने वालो की लम्बी line होती थी और वो मन मर्ज़ी के पैसे चार्ज करता था | बाधा से उत्पन्न होने वाले नवाचार के इस असाधारण अनुभव के आधार पर, Micromax ने जल्द ही एक फोन बनाया जिसकी बैटरी पूरे महीने में बैक-अप थी। राहुल को इस पेशे के बारे में कंपनी में अपने साथियों को मनाने की ज़रूरत थी, क्योंकि वे बाजार में प्रचलित तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण उस व्यापार में प्रवेश करने में काफी संकोच कर रहे थे।

लेकिन जल्द ही, उन्होंने अवसर की परिमाण को महसूस किया और अपनी पहली 'सहनशक्ति बैटरी' फोन लॉन्च किया। उन्होंने बाजार में लगभग 10,000 Pcs का प्रारंभिक स्टॉक रखा। 10 दिनों के भीतर, हर एक फोन बेचा गया था और यह मुंह के प्रचार के माध्यम से और बिना किसी विज्ञापन के हुआ।

राहुल ने कहा कि उनकी कंपनी एक दर्शन में विश्वास करती है - यदि अंतिम उपयोगकर्ता को उत्पाद से एक रूप में लाभ मिलता है, तो उत्पाद निश्चित रूप से एक निश्चित होगा।
"हमें दूसरों द्वारा बनाए गए रोड मैप का पालन नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, हमें अपनी जरूरतों और अपेक्षाओं के लिए तैयार किए गए नए और अधिक अभिनव मॉडल के साथ खुद को एक बनाना होगा। ", 

राहुल पर बल दिया।
इस केंद्र को अपने सभी प्रयासों में रखते हुए, Micromax ने इस तरह महत्वपूर्ण प्रगति की और फोन के पूरे मैदान को लॉन्च करने के लिए आगे बढ़े, सभी आम भारतीय ग्राहकों की विभिन्न आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किए गए। असल में, यह दृष्टिकोण था जिसने उन्हें भारतीय बाजार में दोहरी सिम फोन पेश करने का नेतृत्व किया। वे ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति थे और आज, यह वैश्विक खिलाड़ियों के साथ पूरी तरह से मैदान में कूदने के साथ एक पूरी नई श्रेणी में उभरा है।

आधे घंटे के भीतर, राहुल ने Micromax यात्रा और दर्शन के महत्वपूर्ण क्षणों को पकड़ने में कामयाब रहे जिससे उन्हें सफल होने में मदद मिली। लेकिन जब घटना के अंत में दर्शकों ने जगह से बाहर निकलते हुए कहा, तो यह स्पष्ट था कि वह कई उद्यमियों के दिल को पकड़ने में भी कामयाब रहे जिन्होंने गोलमेज में भाग लिया था, जिससे उन्हें आग के भविष्य के ड्राइवर बनने के लिए आग लग गई थी। 

Saturday, 28 July 2018

Karoly Takács Olympic athlete

Károly Takács
Olympic athlete
Károly Takács was the first shooter to win two Olympic gold medals in the 25 metre rapid fire pistol event, both with his left hand after his right hand was seriously injured.

दोस्तों किसी काम के पीछे पड़ जाओ बस भगवान भी मदत करते है जैसे की यह कहानी है 1938 की Karoly नाम के आदमी की जो Hungary country में रहते थे| Karoly Takacs Shooting प्लेयर थे (Best shooting players in the world). जितनी  भी national championship हुई थी उस कंट्री मैं उसको वो जीत चूके थे और सबको पूरा यकीन था की 1940 में जो Olympic होने वाले है उसमे gold medal केरोली को ही मिलेगा और उन्होंने सालो से ट्रेनिंग करी थी|
उनका एक ही सपना था एक ही focus था की मुझे अपने इस हाथ को दुनिया का सबसे best Shooting Hand बनाना है और वो कामियाब भी हो गए उन्होंने बना लिया अपने हाथ को बेस्ट Shooting Hand बस दो साल का फर्क था|
Karoly Takacs Army में थे| 1938 मैं जब आर्मी का एक ट्रेनिंग कैंप चल रहा था तो practice के समय उनके साथ एक accident हो गया| उनके उसी हाथ मैं जिससे उनको गोल्ड मैडल जितना था (Right hand) मैं एक हथगोला (Hand Grenade) का विस्फोट हो गया और वो हाथ चला गया
जो उनका सपना था जो focus था (सब खत्म) उनके पास 2 रास्ते थे एक तो यह था की वो अपनी बाकी की पूरी जिंदगी रोता रहे और कही जा करके छुप जाए, या अपना जो goal था जिसमे उन्होंने focus किया हुआ था उसको पकड़ करके रखे
1 महीने तक हॉस्पिटल मैं उनका इलाज चला उस हाथ के लिए और ठीक 1 month बाद उन्होंने अपनी ट्रेनिंग शुरू करदी अपने उल्टे हाथ (left hand) की|
Training के एक साल बाद मतलब 1939 में वो वापिस आए नेशनल चैंपियनशिप हो रहे थे वही हंगरी मैं और वहा पर बाकि के बहुत सारे बेस्ट पिस्टल शूटर थे|
उन सब प्लेयर ने Karoly Takacs के पास जाकर उनको congratulate किया| कहा की यार यह होता है जस्बा, यह होती है sport man स्पिरिट, की इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी तुम यहा पर आए हो हमको देखने के लिए और हमारा होसला बड़ाने के लिए|

किसीको नही पता था की वो 1 साल से अपने लेफ्ट-हैण्ड की practice कर रहा था| फिर करोली ने जवाब दिया की मैं यहा तुम्हारा होसला बड़ाने नही आया हूँ, मैं यहा तुम्हारे साथ मुकाबला करने आया हूँ तैयार  हो जाओ|
फिर मुकाबला चालू हो गया था| वहा पर बाकि जब जो मुकाबला करने आए थे वो fight कर रहे थे अपने बेस्ट हैण्ड से और और जो Karoly था वो फाइट कर रहा था अपने ओनली हैण्ड से (मतलब कमजोर हाथ से)
कोन जीता? the man will be only hand, Karoly जीत गया| लेकिन वो यहा नही रुका उसका goal clear था की मुझे अपने इस हाथ को इस country का नही बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बेस्ट शूटिंग हैण्ड बनाना है (World Best Pistol Shooter)
लेकिन Karoly Takacs ने फिर भी हार नही मानी उनको अपने उपर पूरा भरोसा था की होगा-होगा एक न एक दिन जरुर होगा|

लेकिन मुश्किल नाम का यह वर्ड था ही नही उनकी dictionary मैं नहीं था
वो गए पूरी दुनिया के best shooters आए हुए थे जो अपने बेस्ट हाथ से खेल रहे थे और यह अपने only hand से मुकाबला कर रहे थे| और कोन जीता??????? The man will be only hand.

Brian Acton co-founder of WhatsApp

Brian Acton

American computer programmer

Brian Acton is an American computer programmer and Internet entrepreneur. He is the co-founder of WhatsApp, a mobile messaging application which was acquired by Facebook Inc. in February 2014 for US$19 billion. He was formerly employed at Yahoo Inc. 



★ ब्रायन ऐक्टन (Brian Acton) ये नाम तो आप सभी ने सुना ही होगा। अगर नहीं भी सुना तो कोई बात नहीं आज तो सुन ही लिया, और मैं उम्मीद करती हूँ, कि आज इस आर्टिकल को पढ़कर शायद ही इनका नाम दोबारा हमें आपको या किसी और को याद दिलाना पड़े। आज सभी के पास Android फोन हैं, और WhatsApp अप जो कि एक ऐसी अप्लीकेशन है, जो आज के समय में शायद ही किसी शख्स के फ़ोन में ना हो। कुछ लोगो को Android फ़ोन की जरुरत नहीं होती, लेकिन वह फिर भी केवल WhatsApp चलाने के लिए Android फ़ोन खरीदते हैं। हम दिनभर WhatsApp पर लोगो से बात करते हैं।

दोस्तों के साथ अपने फोटो, गाने शेयर करते हैं, पर हम WhatsApp का इतिहास नहीं जानते। ब्रायन ऐक्टन (Brian Acton) जो कि आज सभी के Android फोन में यूज़ होने वाली WhatsApp अप अप्लीकेशन के co-founder हैं, आज से लगभग 6 साल पहले 2009 में फेसबुक पे जॉब के लिए गए थे। उनका सपना था कि वो फेसबुक में जॉब करे, परन्तु फेसबुक ने उन्हें जॉब पर नहीं रखा, और रिजेक्ट कर दिए।

ब्रायन ऐक्टन (Brian Acton) इससे बहुत दुखी हुए, परन्तु उन्होंने हार नहीं मानी और जॉब के लिए ट्विटर पर अप्लाई किया, परन्तु यहाँ भी उन्हें निराशा ही मिली, और उन्हें ट्विटर ने भी रिजेक्ट कर दिया। आज के समय में अगर किसी को एक ही बार किसी कम्पनी से रिजेक्ट कर दिया जाता है, तो या तो वह कुछ गलत कदम उठा लेता है, या फिर अपनी खुद की योग्यता और काबिलियत पर शक करने लगता है।

आज लोग अपने को एक जगह से रिजेक्ट होता देख, खुद को बहुत निराश और हताश कर लेते हैं। ब्रायन ऐक्टन (Brian Acton) ने ऐसा कुछ नहीं किया। वो उठे और फिर से एक नयी आशा के साथ उन्होंने एक नयी शुरुआत की। उन्होंने खुद और अपने दोस्त के साथ मिलकर दिन रात मेहनत की, और अपने बुलंद हौसले और इरादो के दम पर Whatsapp को बना डाला। वो Whatsapp जिससे आज पूरी दुनिया जुडी हुई हैं।

अब 5 साल बाद उसी फेसबुक ने जिसने 6 साल पहले ब्रायन ऐक्टन (Brian Acton) को अपने यहाँ जॉब पर भी नहीं रखा था, उसी फेसबुक ने उनकी बनी अप्लीकेशन WhatsApp (व्हात्सप्प) को 19 बिलियन डॉलर में ख़रीदा, जो भारतीय रुपयों के हिसाब से लगभग एक लाख करोड़ रूपये से भी अधिक की धनराशि है। ब्रायन ऐक्टन (Brian Acton) जिस कंपनी में नौकरी मांगने गए थे, आज वो उसी कंपनी के शेयर होल्डर बन गये। दोस्तों इसे कहते हैं आत्मविश्वास। जिस कंपनी में वो एक छोटी सी नौकरी माँगने गए थे, उसी कंपनी ने उनकी बनी अप्लीकेशन WhatsApp (व्हात्सप्प)। को खरीदने के लिए 19 बिलियन डॉलर दिए। जो आज तक की सबसे बड़ी डील मानी गयी है। जिस कंपनी में जॉब करने का उनका सपना था, वो उसी कंपनी में शेयर होल्डर बन गये। दोस्तों आपकी सफलता आपकी सोच पर निर्भर करती हैं।

आप अपनी एक असफलता से दुखी होकर अपनी ज़िन्दगी को खत्म कर लेते हैं, या अपनी उसी असफलता से मिले दुःख को अपनी ताकत बनाकर फिर से नई उम्मीद के साथ पुनः अपनी सफलता के लिए प्रयास करने लग जाते हैं। आप अपनी एक असफलता से थककर बैठ जाते हैं, या अपनी उस असफलता से अपने को पहले से भी अधिक मजबूत बनाते हैं। दोस्तों अपने अंदर छुपी क्षमता को पहचानिये और एक नयी ऊर्जा के के साथ उठ खड़े होइए आप जरूर सफल होंगे।☺